यहाँ जाने की वजहें
- दुर्गा माँ, सिद्धिविनायक और सालासर हनुमान के मंदिर
- 2010 में उद्घाटन हुआ समकालीन मंदिर परिसर
- दर्शन और आरती की जानकारी सीधे मंदिर से
जिसलिए आएँ, उसके लिए समय दें
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार परिसर में श्री दुर्गा माँ, श्री सिद्धिविनायक और श्री सालासर हनुमान के मंदिर हैं। किसी का उद्देश्य दर्शन होगा, तो कोई शांत सांस्कृतिक सैर करना चाहेगा। निकलने से पहले इसी पर थोड़ी बात कर लें। जो पूजा करना चाहते हैं उन्हें पूरा समय मिले और बाकी लोग बेचैनी से बाहर इंतज़ार न करें—ऐसा प्लान पूरे समूह के लिए अच्छा रहता है।
जीवंत धार्मिक स्थल की तरह देखें
यह आधुनिक दौर का पूजा-स्थल है; ट्रस्ट परिसर का उद्घाटन मई 2010 में होने की जानकारी देता है। इसे प्राचीन स्मारक की तरह देखने के बजाय ऐसी जगह समझें जहाँ आज भी पूजा होती है। पहुँचकर परिसर और आने-जाने का रास्ता समझ लें। कुछ देर फ़ोन रखकर बैठना या शांत खड़े रहना भी सैर का हिस्सा हो सकता है। हर कोने की तस्वीर लेना ज़रूरी नहीं।

सांझ की रोशनी में जगमगाता लोनावला का श्री नारायणी धाम।
Rajib Ghosh · CC BY-SA 4.0 · आकार और फ़ाइल साइज़ कम किए गएदर्शन और आरती की समय-सारणी अलग देखें
मंदिर दर्शन और आरती के अलग पेज प्रकाशित करता है। मंदिर की जानकारी में दोपहर को पट बंद रहने का समय भी है। किसी खास वक्त पहुँचने का प्लान हो तो दोनों पेज जाँचें; नक्शे की सामान्य लिस्टिंग पर्याप्त नहीं हो सकती। आरती में शामिल होना हो तो वर्तमान समय सीधे मंदिर से पूछें और कुछ पहले पहुँचें। हमारे बताए मिनट केवल यात्रा का अनुमान हैं, दिन में कभी भी प्रवेश की अनुमति नहीं।
छोटी बातें सैर को सहज बनाती हैं
पूजा-स्थल के अनुकूल कपड़े पहनें, जूते रखने की मौके पर बताई व्यवस्था मानें और पूजा या दर्शनार्थियों की तस्वीर लेने से पहले पूछें। फ़ोन पर बात या समूह की चर्चा प्रार्थना कर रहे लोगों से दूर करें। बच्चों को प्रवेश से पहले ही समझा दें, ताकि अंदर हर बात पर टोकना न पड़े। जो पूजा में शामिल नहीं होना चाहें, उनके लिए पहले से मिलने की उपयुक्त जगह तय कर लें।
सुविधा और आगे के प्लान का ध्यान
आधिकारिक पता तुंगारली रोड पर कैवल्यधाम के पास है। गाड़ी से उतारने की जगह, पैदल दूरी या बिना सीढ़ियों वाले प्रवेश की ज़रूरत हो तो पहले मंदिर से पूछें। खाने या अन्य सुविधाओं को सामान्य सैर में शामिल न मानें; ज़रूरत हो तो उनकी व्यवस्था अलग से जान लें। इसके बाद खाना, शहर का छोटा काम या सीधे विला लौटना अच्छा रहेगा। अगली जगह की जल्दबाज़ी से दर्शन का समय छोटा न करें।
निकलने से पहले काम के लिंक
प्लान बनाते समय जगह की ताज़ा जानकारी और स्थानीय हालात देख लें।
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